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औद्योगिक आस्थान योजना

औद्योगिक आस्थान योजना का मुख्य उद्देश्य उद्योग विभाग के द्वारा लघु उद्योगों के विकास हेतु प्रारम्भिक अवस्थापना आवश्यकता (भूमि) की उपलब्धता हानि-लाभ रहित कीमत पर तथा दीर्घ कालिक आसान किश्तों पर सुनिश्चित कराने के लिए है। औद्योगिकरण को प्रोत्साहित करने के लिए "औद्योगिक आस्थान योजना" का शुभारम्भ द्वितीय पंचवर्षीय योजना में किया गया था। औद्योगिक आस्थान योजना के अन्तर्गत प्रदेश में लघु उद्योगों की स्थापना, विस्तारीकरण एवं आधुनिकीकरण के लिए इच्छुक उद्यमियों को भूखण्ड एवं शेडों के साथ-साथ उनमें आवश्यक अवस्थापना सुविधाओं को सुसज्जित कर उपलब्ध कराया जाता है। प्रदेश की औद्योगिकरण की आवश्यकता एवं महत्ता के परिपेक्ष्य में इस योजना के अन्तर्गत औद्योगिक आस्थानों का विकास ग्रामीण/नगरीय क्षेत्रों में किया गया।

बृहद औद्योगिक आस्थान 1960 के दशक में 56 जिलों में 78 स्थानों पर स्थापित हुए हैं जिनमें 987 शेड और 3648 भूखण्ड विकसित हैं, जिसके सापेक्ष 981 शेड एवं 3593 भूखण्ड आवंटित हैं जिनमें 2675 इकाईयाँ स्थापित हैं। वर्तमान में 6 शेड एवं 55 भूखण्ड रिक्त हैं। शेडों की कीमत को हायर परचेज अनुबन्ध के साथ तथा भूखण्डों को 99 वर्षीय लीज डीड के आधार पर उद्यमियों को दिया जाता है। यहां पर उद्यमियों को उद्यम स्थापनार्थ ऋण वित्तीय संस्थाओं से दिलाने के लिये भूमि/शेड को जमानत के रूप में रखने के लिए प्रथम चार्ज वित्तीय संस्थाओं को देने की अतिरिक्त सुविधा उपलब्ध है।

छोटे-छोटे सूक्ष्म स्तरीय लघु उद्योगों को ग्रामीण/विकास खण्ड/तहसील स्तर पर प्रोत्साहित करने के लिये मिनी औद्योगिक आस्थानों की स्थापना वर्ष 1985 से 1992 मे मध्य की गयी है। जिसमें 175 मिनी आद्योगिक आस्थान विकसित हुए, प्रत्येक मिनी औद्योगिक आस्थान का औसत क्षेत्रफल 2.5 एकड़ है तथा छोटे-छोटे भूखण्ड 50-200 वर्ग मी0 तक के 7997 भूखण्ड विकसित हुए। अन्य जिला स्तरीय योजनाओं (यथा- मा0 काशीराम शहरी आवास योजना, तहसील भवन, एफ0सी0आई0 गोदाम आदि) में हस्तान्तरण के फलस्वरूप वर्तमान में 161 मिनी औद्योगिक आस्थानों में 7560 भूखण्ड विकसित हैं, जिसके सापेक्ष वर्तमान में 5892 भूखण्ड आवंटित हैं एवं 1668 भूखण्ड रिक्त हैं तथा किसी भी मिनी औद्योगिक आस्थान में शेडों का विकास नही कराया गया है।

औद्योगिक आस्थानों में प्रारम्भ में विकसित की गयी अवस्थापना सुविधाएं (सड़क, सम्पर्क मार्ग, जल निकास, पुलिया, विद्युत फीडर एवं विद्युत लाइन) अत्यन्त जीर्ण-क्षीण/जर्जर अवस्था में हो जाने के कारण, विश्व स्तरीय प्रतिस्पर्धा के युग में औद्योगिक आस्थानों में स्थापित लघु उद्यमियों को अपनी इकाई को सुचारू रूप से चलाने के लिए अवस्थापना सुविधाओं का उच्चीकरण एवं सुदृढ़ीकरण की नितान्त आवश्यकता है।